नूर आलम नूर

नूर आलम नूर

    युवा कवि।विभिन्न साहित्यिक पत्रिकाओं में कविताएं प्रकाशित। जंगल मैं जब भी जंगल की ओर देखता हूँमुझे एक घर दिखता है एक ऐसा घर जहां मुझे छोड़ सब दिखते हैंमां, पिता, दादा, दादीऔर श्रृंखलाबद्ध पहाड़पहाड़ों के बीच अपना रास्ता तरासतीकेदार जी की नदी भी मैं जब भी...