कविता
युवा कवि। कटिहार में रेल कर्मचारी। राँची यह शहर बिलकुल अल्हड़ हैयहां लोगों की ही तरहअब भी बचा है गांवबचा है पानी स्वर्ण रेखा की आंखों में यह बिलकुल शांत हैकभी भागता नहींन कभी हलकान होताबल्कि हमेशा खुश रहता हैएक मासूम बच्चे की तरहशहर का शहर की तरह न...
कविता
युवा कवि। कटिहार में रेल कर्मचारी। बंदूक की खेती मेरे पास अनाज हैमैं इसे धरती में बो सकता हूँऔर उगा सकता हूँ ढेर सारे अनाज अनाज उगाना दरअसल प्रेम करने जैसा हैहमेशा कई गुना लौटाकर देता है तुम्हारे पास बंदूक हैतुम इसे बो नहीं सकतेउगा नहीं सकते ढेर सारी...
कविता
युवा कवि।संप्रति-कटिहार में रेल कर्मचारी। जब किसी मजदूर कापुनर्जन्म होता होगातो वह निश्चय हीकुत्ता, बैल, गधा या भेड़ नहीं बनता होगाबल्कि वह बनता होगाकठफोड़वाउसकी चोंच काफी सख्त होती हैमजदूर के हाथ की तरहदरख्त पर उसकी चोंच केलगातार प्रहार देखकरऐसा लगता हैवह सदियों से...
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