कविता
युवा कवि।केंद्रीय हिंदी संस्थान, दिल्ली में एक परियोजना से जुड़े। जब खेलते हैं शब्द हमारे पासनहीं मालूम क्यों चले आते हैं पासउनके होने से क्यों कुछ फर्क नहीं पड़तामुझे शब्दों के बारे में कुछ नहीं जानना होतामैं जानना चाहता था केवल वह सबजिससे लोग गढ़ते...
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