कविता
युवा कवि। सरकारी प्रशासिनिक सेवा में। गजल नए मौसम में ढलकर देखना थाहमें खुद को बदलकर देखना था बला की खूबसूरत है ये दुनियाइसे घर से निकलकर देखना था बहुत मुश्किल था रस्ते रास आतेहमें कुछ दूर चलकर देखना था हम अपने आपसे उकता गए हैंहमें खुद से निकलकर देखना था...
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