कविता
सिक्किम विश्वविद्यालय सहायक प्रोफेसर। ‘कंचनजंघा पत्रिका’ (सिक्किम) का संपादन। युद्ध युद्ध महज युद्ध नहीं होतेयुद्ध में सूख जाती हैंनदियों की आत्मापहाड़ों का जिस्म सूख जाता हैरत्ती भरसपनों का समुद्र भी युद्ध में सिर्फ वे ही नहीं मरतेमरती है भाषा की देहइस...
Recent Comments