कविता
इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्रथम वर्ष का छात्र। जो टूटे हैं प्रेम में कल जब मैं सुबह सोकर उठूंगाऔर खिड़की से बाहर देखूंगाकोई कली खिल उठेगीया कोई बयार इठलाती हुईकिसी पेड़ के कान खींच करभाग जाएगीऔर दर्द से सुसुआते हुए पेड़को चुप कराने के लिएलोरियां गाने लगेगी...
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