प्रमोद वैष्णव

प्रमोद वैष्णव

    कवि, लेखक और नाट्यकार। करीब पचास नाटकों का लेखन। 1.एक मौका तोदुनिया में सबको मिलता हैतुमने वह धोखा देने में गंवा दियाहमने यकीन करने में। 2.कुछ लिखकरअपनी निगाहों में भीकुछ छोड़ दिया करोमुझे इनको पढ़ना अच्छा लगता है। 3.करीब होकर भीनजर न आनासिर्फ कोहरे की वजह...