कविता
युवा कवि। भूखी बिल्ली की मुस्कान भूखी बिल्ली की आंखों मेंतुमने झांका है कभी?जैसे आंधियों में झूलता हुआ दीपककांपते हुए स्वप्न उसकी भूख, उसके पंजों में नहींउसकी रीढ़ में उतर आई हैजैसे हमारे खेतों में घुस आए नहरों के पानी मेंपला हो कोई अजगर बिल्ली के पेट में दौड़ते...
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