प्रतिभा चौहान

प्रतिभा चौहान

    वरिष्ठ कवयित्री। प्रकाशित कृतियां: ‘जंगलों में पगडंडियां’, ‘युद्ध में जीवन’, ‘क्षितिज हथेली पर’, ‘बारहखड़ी से बाहर’ ‘पेड़ों पर हैं मछलियां’। संप्रति जिला न्यायाधीश, बिहार न्यायिक सेवा। दरअसल दरअसल तुम्हारी बातें हैं मेरे अकेलेपन की बांसुरीठीक वैसे ही जैसे...
प्रतिभा चौहान

प्रतिभा चौहान

    युवा कवयित्री। अद्यतन कविता संग्रह ‘पेड़ों पर हैं मछलियां’। संप्रतिः अपर जिला न्यायाधीश, बिहार न्यायिक सेवा। हथेली पर सूरज हथेली पर पिघलता हुआ सूरजऔर मुट्ठी में बंद जिजीविषाअंधेरी रात सी शांत और बेखौफ बचा रहेगा कुछ स्पर्श सूरज काबची रहेगी कुछ शांति...
दर्प : प्रतिभा चौहान

दर्प : प्रतिभा चौहान

वरिष्ठ लेखिका। कविता संग्रह ‘जंगलों में पगडंडियाँ’, ‘पेड़ों पर हैं मछलियाँ’, ‘बारहखड़ी से बाहर’। संप्रति न्यायाधीश, बिहार न्यायिक सेवा।   सुबह के साढ़े छह बज रहे हैं। मौसम की ताजगी माहौल को खुशनुमा बना रही है। फूलों की डालियां ताजे खिले फूलों के वजन से झुकी जा रही...
प्रतिभा चौहान

प्रतिभा चौहान

    वरिष्ठ कवयित्री।कविता संग्रह ‘जंगलों में पगडंडियाँ’, ‘पेड़ों पर हैं मछलियाँ’, ‘बारहखड़ी से बाहर’।संप्रति न्यायाधीश, बिहार न्यायिक सेवा। उम्मीद पतझड़ के बादपेड़ की उम्मीदें खत्म नहीं होतींपर युद्धखत्म कर देता हैउम्मीदों की भी उम्मीद। युद्ध से परे युद्ध...
कविता : प्रतिभा चौहान

कविता : प्रतिभा चौहान

      कविता संग्रह  ‘पेड़ों पर मछलियाँ’। न्यायाधीश, बिहार न्यायिक सेवा। कविता – एक वे आगे बढ़ते गएउन्होंने रास्ते में आई हर एक चीज़ काअपने हिसाब से रूप बदलना चाहाऔर बदल डालावे और आगे बढ़ेउन्होंने अपने समूहों को सर्वश्रेष्ठ कहाखुद को...