कविता
युवा गजलकार। ‘बस इतना ही’ (कविता संग्रह), ‘शरद की धूप’ (ग़ज़ल संग्रह)।संप्रति अध्यापन। गजल 1.ख़ुशी के गीत आख़िर गुनगुनाएं हम भला कब तकबताओ, दर्द में भी मुस्कुराएं हम भला कब तक छुपा भी लें अगर हर बार अश्कों को निगाहों मेंमगर इस ज़र्द चेहरे को छुपाएं हम...
कविता
युवा गजलकार। ‘बस इतना ही’ (कविता संग्रह), ‘शरद की धूप’ (ग़ज़ल संग्रह)।संप्रति अध्यापन। गजल हमारे हौसलों को डगमगाने आ गई दुनियाचढ़े जैसे ही हम ऊपर, गिराने आ गई दुनिया सफलता क्या मिली, हिस्सा बंटाने आ गई दुनियान जाने कौन-से रिश्ते निभाने आ गई दुनिया...
कविता
युवा गजलकार। ‘बस इतना ही…’ (कविता संग्रह)’, ‘शरद की धूप’ (ग़ज़ल संग्रह)। संप्रति अध्यापन। ग़ज़ल आज जो तकलीफ़ में ये ज़िंदगी है, ग़म न करदर्द में तू ही नहीं, हर आदमी है, ग़म न कर देखता हूँ जिन गुलाबों की खिली कलियां यहांबाग में कांटों घिरी वह हर कली है, ग़म...
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