गुजराती कविता : प्रवीण पांड्या

गुजराती कविता : प्रवीण पांड्या

गुजराती कवि-नाटककार।तीन कविता संग्रह और तीन नाटक प्रकाशित। संकट गहरा रहा है आप कविता केकविता बने रहने परबहुआयामी बहस कर रहे हैंऔर यहाँइनसान के इनसान बने रहने परअनेकानेक प्रश्नचिह्न लग रहे हैंसंकट गहरा रहा हैसंकट इसलिए भी गहरा रहा हैक्योंकि वह लकड़ी का गट्ठर खुल चुका...