कविता
युवा कवयित्री।विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कविताएं प्रकाशित। कवि तुम्हें मुझपर विश्वास है यह ठीक हैपर मुझे नहीं सीखनाकिसी का भी पात्र होनाकि मैं पशु नहींजो बांटा जाए जंगली और पालतू मेंऔर पालतू हो जाऊं कि फिरकहते हुए अपना सब दुखअवसाद मुझमें भर दो तुम फिर ढक...
कविता
युवा कवयित्री। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कविताएं प्रकाशित। सभा में सबकी जेबों में दुख थानमक के ढेले जैसाबारिश के मौसम के लिए बेताबकि बाहर बरसेभीतर से छीज कर त्वचा पर उभरेपहचान लिया जाएसभा में सभी के चेहरे की आब पर थाअलग-अलग तरह का दुखसबके लटके चेहरे...
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