प्रियंका सिंह

प्रियंका सिंह

    युवा कवयित्री। शोधार्थी, कलकत्ता विश्वविद्यालय।     यात्राओं के संगी देखोधुंध से उड़ते बादलरुई की फाहों की तरहआकर ठहर गए हैंहमारी हथेलियों मेंजुड़ी हुई हथेलियों में समाहित हैहमारा संसार तुम्हारे बाएं कांधे के सहारेटिका मेरा मन है हरासदाबहार वृक्षों वाले वन...