प्रियव्रत जोशी

प्रियव्रत जोशी

  युवा कवि। इग्नू से हिंदी में परास्नातक। पहाड़ पहाड़ों पर जो पगडंडियाँ हैंकोई नहीं जानता किसने बनाईं क्यों बनाईं‘दादा के दादा ने बनाई’- यह बातहर दादा ने कही अपने पोते से इसे सुन पहाड़ खड़ाकनखियों से उन्हें देख मुस्कराता रहाजैसे मुस्करा जाता हैएक गुमनाम गीतकारजब वह...