कविता
युवा गजलकार। हिंदी प्राध्यापक। ले गया था वो आंखों का भी मंजर ले गया थामेरा आंसू समंदर ले गया था कभी उसकी जमींदारी रही थीगया तो सिर्फ बिस्तर ले गया था ये सच है जीत ली थी उसने दुनियामगर फिर क्या सिकंदर ले गया था अजब उल्फत उसे महबूब से थीलगा जो सर पे पत्थर...
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