खोने का सुख : राजेंद्र श्रीवास्तव

खोने का सुख : राजेंद्र श्रीवास्तव

कहानियों, कविताओं और आलोचना की 15 पुस्तकें प्रकाशित। संप्रति एक बैंक में कार्यरत। मंजुला की फ्रेम जड़ी एक गुना एक आकार के फोटो को मैंने बाहर निकाला। यह मंजुला का बहुत सुंदर फोटो था और उसके चेहरे पर स्निग्ध मुस्कान थी। मैंने रूमाल से फोटो पर जमी गर्द झाड़ी। छोटे भाई ने...
सात क्रांतिकारी : राजेंद्र श्रीवास्तव

सात क्रांतिकारी : राजेंद्र श्रीवास्तव

    प्रकाशित कृतियां :  ‘अभी वे जानवर नहीं बने’, ‘कोई तकलीफ़ नहीं’, ‘प्रतिनिधि कहानियां’, ‘सपनों का गणित’ (कहानी-संग्रह)। ‘सुबह के इन्तज़ार  में’ (नाटक-संग्रह)। ‘काग़ज़ की ज़मीन पर’ (संपादित पुस्तक)। ‘सृजन की वीथिका’, ‘सृजन का उत्सव’ (आलोचना)। हम आठ थे। तब तक...