रांग नंबर : राजेश पाठक

रांग नंबर : राजेश पाठक

सुमित पटना से गिरिडीह जा रहा था।स्टेशन पर वर्षों बाद कॉलेज के सहपाठी रमन से उसकी भेंट हो गई।इस तरह अकस्मात भेंट होने से दोनों खुश हुए।वे एक-दूसरे से हाथ मिला ही रहे थे कि उनकी ट्रेन आ गई।दोनों संयोग से एक ही ट्रेन से सफर करने वाले थे। रमन ने कहा – चलो अब ट्रेन...