राकेश रंजन

राकेश रंजन

  चर्चित कवि। संप्रति बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर में प्राध्यापक। ‘अभी-अभी जनमा है कवि’, ‘चांद में अटकी पतंग’ और ‘दिव्य कैदखाने में’ (कविता संग्रह)। ‘मल्लू मठफोड़वा’ (उपन्यास), ‘रचना और रचनाकार’ (आलोचना)। ‘कसौटी’ (अनियतकालीन साहित्यिक पत्रिका) के विशेष...
राकेश रंजन

राकेश रंजन

  चर्चित कवि। संप्रति बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर में सहायक प्राध्यापक। ‘अभी-अभी जनमा है कवि’, ‘चाँद में अटकी पतंग’ और ‘दिव्य कैदखाने में’ (कविता संग्रह)। ‘मल्लू मठफोड़वा’ (उपन्यास), ‘रचना और रचनाकार’ (आलोचना)। ‘कसौटी’ (अनियतकालीन साहित्यिक पत्रिका) के विशेष...
नसीहत : राकेश रंजन

नसीहत : राकेश रंजन

युवा कवि और समीक्षक। ‘दिव्य कैदखाने में’ (कविता संग्रह), ‘मल्लू मठफोड़वा’  (उपन्यास),  ‘रचना और रचनाकार’ (आलोचना) प्रकाशित। फिलहाल अध्यापन। जब कभीहोने लगेनिराशा से मन बोझिलहताशा की धूप करने लगे तुम्हें क्षीणबैठना अपने पिता के पासऔर बतियाना उनसेजब कभी अनजाने भय के साए...