कविता
संस्कृत गीत संग्रह ‘शाश्वती’ और काव्य संग्रह ‘मुक्ताशती’ चर्चित। अपने बाहर अंदर देख,पागल हुआ समंदर देख। इनसानों के पते पूछते,खुले हाथ में खंजर देख। इस मिट्टी में लोट रहे क्योंलिखा यहां पर बंजर देख। सिंहों की खातिर हैं पिंजड़े,कूद रहे हैं बंदर देख। शापित...
Recent Comments