रोहिणी अग्रवाल

रोहिणी अग्रवाल

    वरिष्ठ आलोचक एवं कहानीकार।अद्यतन आलोचना पुस्तक ‘कथालोचना के प्रतिमान’। बभ्रुवाहन हाथ में हथियार होंऔर सिर पर दु:शासन का वरदहस्तअठारह अक्षौहिणी सेनाओं का बलमाथे पर चढ़ने लगता है आप ही आपटप-टप चूने लगता है अहंकार का महुआपूरा संसार शतरंज की बिसात बन जाता है...