विस्लावा शिम्बोर्स्का (1923-2012), अनुवाद : सदानंद शाही

विस्लावा शिम्बोर्स्का (1923-2012), अनुवाद : सदानंद शाही

वरिष्ठ कवि, आलोचक और लोक साहित्य के विद्वान। ‘साखी’ पत्रिका के संपादक। रैदास के पदों का काव्यांतरण हाल में प्रकाशित। बनारस हिंंदू विश्वविद्याल के हिंदी विभाग के पूर्व-प्रोफेसर। पहली नज़र का प्यार वे दोनों मानते हैं किएक आकस्मिक से जुनून ने उन्हें जोड़ाऐसी सुनिश्चितता...
संग तराश- जो बनारस की एक पवित्र सुबह अदृश्य होने से पहले मौजूद था। : सदानंद शाही

संग तराश- जो बनारस की एक पवित्र सुबह अदृश्य होने से पहले मौजूद था। : सदानंद शाही

    वरिष्ठ कवि, आलोचक और लोक साहित्य के विद्वान। ‘साखी’ पत्रिका के संपादक।रैदास के पदों का काव्यांतरण हाल में प्रकाशित।बनारस हिंदू विश्वविद्याल के हिंदी विभाग में प्रोफेसर। वह बनारस की एक पवित्र सुबह थीताज़ा फूलों की ख़ुशबूगंगा की लहरों पर तैर रही थीमंदिर की...