उपन्यास : अंधेरे में चीख – संध्या नवोदिता

उपन्यास : अंधेरे में चीख – संध्या नवोदिता

युवा कवयित्री, लेखिका, पत्रकार और अनुवादक। आजाद भारत के जो सपने देखे गए, आजादी के बाद वे सभी लगभग ध्वस्त होते दिखाई दे रहे हैं। जनता की जो लूट अंग्रेज कर रहे थे देसी राज में वह लूट और गहरी, और निरंतर होती गई है। गुलामी के दौर में एक उम्मीद तो थी कि स्वतंत्र होंगे तो...
उपन्यास : अंधेरे में चीख – संध्या नवोदिता

उपन्यास के तीन विश्व : संध्या नवोदिता

युवा कवयित्री, लेखिका, पत्रकार और अनुवादक।   लिखना शुरू किया तो केवल यह चिंता थी कि जितना कहना है उसे कम से कम शब्दों में कैसे कहा जाय? मैं वह लिखता हूँ जो मुझे पसंद है और मेरा पाठक वह है जिसे मेरा लिखा पसंद है। लेखक शिवमूर्ति की ख्याति ग्रामीण जीवन के कुशल...
कविता : सुभद्रा कुमारी चौहान, पाठ : संध्या नवोदिता

कविता : सुभद्रा कुमारी चौहान, पाठ : संध्या नवोदिता

कविता पाठ : संध्या नवोदिता ध्वनि संयोजन : अनुपमा ऋतु दृश्य संयोजन-सम्पादन : उपमा ऋचा प्रस्तुति : वागर्थ, भारतीय भाषा पारिषद कोलकाता अनुपमा ऋतु, उपमा ऋचा, संध्या नवोदिता, सिल्विया...
गद्य में जिया हुआ सच : संध्या नवोदिता

गद्य में जिया हुआ सच : संध्या नवोदिता

युवा कवयित्री, लेखिका, पत्रकार और अनुवादक।   कभी कोई निरा वर्तमान नहीं होता। वर्तमान एक अबाध गति के साथ घटित होता हुआ किसी मायावी प्रतिनिधित्व का रूप लेने लगता है। वह बार-बार परिभाषित होना चाहता है। यहां समस्या किसी एकल सच के न होने की है। शहर एक समग्र...
सिल्विया प्लाथ

सिल्विया प्लाथ

मैं बन्द करती हूँ अपनी आँखें और मृत हो जाता है यह संसारमैं उठाती हूँ अपनी पलकें और सब लौट जाता है फिर एक बार(सोचती हूँ, तुम्हें गढ़ा हैं मैंने अपने जेहन में) तारे होते हैं नृत्यरत आसमानी और लालऔर अनियंत्रित अन्धकार लेकर आता है रफ़्तारमैं बन्द करती हूँ अपनी आँखें और...