सभ्य समाज रचने के लिए कविता : संजय जायसवाल

सभ्य समाज रचने के लिए कविता : संजय जायसवाल

कवि और समीक्षक. विद्यासागर विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर एवं प्रबुद्ध रंगकर्मी. कविता की लंबी यात्रा से गुजरते हुए कहा जा सकता है कि यह जीवन से एक संवाद है। इसमें जीवन की असंख्य बातों पर बातचीत होती है। यह जितनी भावपूर्ण दुनिया है उतनी ही चेतना संपन्न भी। संबद्धता,...
समुद्र पार से बोल रही हैं आप्रवासी स्त्री कथाकार : प्रस्तुति संजय जायसवाल

समुद्र पार से बोल रही हैं आप्रवासी स्त्री कथाकार : प्रस्तुति संजय जायसवाल

आप्रवासी स्त्री कथाकारों ने विस्थापन, अपने नए परिवेश और हिंदी कहानी में योगदान पर पहली बार विस्तृत चर्चा की भारतीय भाषा परिषद के विश्व हिंदी संवाद-2 में। प्रसिद्ध कथाकार मधु कांकरिया ने कहा, ‘70 के दशक में तेजस्वी स्त्री कथाकारों की पहली पीढ़ी आई थी। उन्होंने पूछा था-...
परिचर्चा : फणीश्वरनाथ रेणु का महत्व

परिचर्चा : फणीश्वरनाथ रेणु का महत्व

प्रस्तुति : संजय जायसवाल कवि और समीक्षक। विद्यासागर विश्वविद्यालय, मेदिनीपुर में सहायक प्रोफेसर।   फणीश्वरनाथ रेणु आंचलिक उपन्यास और नई कहानी दौर के विशिष्ट कथाकार हैं। वे हिंदी के पहले कहानीकार हैं, जो ग्रामीण क्षेत्रों में विज्ञान और टेक्नोलॉजी के प्रवेश का...
नए परिप्रेक्ष्य पर विश्व हिंदी संवाद : प्रस्तुति संजय जायसवाल

नए परिप्रेक्ष्य पर विश्व हिंदी संवाद : प्रस्तुति संजय जायसवाल

हिंदी के साहित्येतिहास को अधिक समावेशी बनाना जरूरी   हिंदी साहित्य के इतिहास को फिर से लिखने का सवाल बार-बार उठता रहा है। 5 दिसंबर 2020 को भारतीय भाषा परिषद की एक ऑनलाइन अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में साहित्येतिहास के नए परिप्रेक्ष्य पर विचार करते हुए कहा गया कि...