आलेख, विचार
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में शोध छात्र। राजा शिवप्रसाद ‘सितारेहिंद’ (1823-1895) का लेखन अपने समय के अंतर्विरोधों से घिरा नजर आता है।नवजागरण के आगोश में नित नए चिंतन तथा नई खोजों के दौर में उनके लेखन में किसी एक दृष्टि का बोलबाला नहीं है, बल्कि घटनाएं, परिस्थितियां...
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