कविता
वरिष्ठ कवि।कविता संग्रह, ‘उँगलियों में परछाइयाँ’।दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्यापन। तुम आओ तो घरज्यों का त्यों हैहर चीज वहीं हैजहां तुमने रखी थीपता नहीं सब उजाड़ लग रहा हैजैसे यहां कभी कोई रहा ही नहींअभी चंद घंटे हुए हैंतुम्हें घर से गएऔर देखोसारे...
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