कविताएं : सरस्वती रमेश

कविताएं : सरस्वती रमेश

पिछले कई वर्षों से स्वतंत्र लेखन।एक कविता संग्रह ‘मां’। पिता जितनी बार पीहर आईपिता! तुम और बूढ़े हो गएतुम्हारे बलशाली कंधे कुछ झुक गए हैंयाद है! इन पर बैठ कर कभी मेला देखने जाते थे हमतुम्हारे मजबूत कदम कुछ दरकने लगे हैंइन्हीं कदमों से तुम नाप आते थे सारा गांवतुम्हारे...