सतपाल ख़याल कविता युवा कवि। कई पत्र-पत्रिकाओं में गजलें प्रकशित। इंटरनेट पत्रिका – ‘आज की ग़ज़ल’ का 13 बरस तक संपादन। पेशे से इंजीनियर। गज़ल 1उजाला बुन रहे थे वो कहाँ हैंजो लेकर लौ चले थे वो कहां हैं उजालों की हिफ़ाज़त करने वालोदिए जो जल रहे थे वो कहां हैं वो किन...
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