कविता
प्रशासकीय पद से सेवानिवृत्त। बाल उपन्यास ‘लहू के प्यासे’, कविता संग्रह ‘शब्दों के शीशम पर’, ‘कितनी दूर और चलने पर’। कुओं में सुबह जी हांकुओं में भी सुबह होती हैउन पलों में झिलमिलाता है उनका पानी ईंटेंजिन्होंने बांधकर रखी हैंउनकी दीवारेंगिनी जा सकती हैं,...
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