कविता
सरकारी विद्यालय में अध्यापिका। काव्य-संग्रह ‘किनारे पर आकर’ प्रकाशित। बची हुई सुंदरता अपने अधिकार में लेना चाहती हूँपृत्वी पर बची हुई कुछ अनोखी चीजेंजानती हूँ उसे ढूँढ़ना उतना मुश्किल नहींबस एक दिन उठना होगा सूरज से पहलेपत्तों पर पर पड़ी ओस कोनजररों के...
Recent Comments