कविता
रांची विश्वविद्यालय के एक कॉलेज में अध्यापन। विभिन्न आंदोलनों में सक्रिय भागीदारी, आदिवासी कला, संस्कृति, भाषा साहित्य, पर्यावरण के अध्ययन में विशेष रुचि। काव्य संग्रह ‘दिसुम का सिंगार’ प्रकाशित। धरती और प्रेम हम जंगल में जंगल के हिस्से होते हैंऔर पहाड़ों...
कविता
वरिष्ठ आदिवासी कवयित्री। पुुस्तक ‘आदिवासी देशज संवाद’ और काव्य संग्रह, ‘दिसुम का सिंगार’। तुम्हारे बिना मैं डरती हूँजब तुम जंगल की पगडंडियों सेशहर जाते होजब तुम रेलवे स्टेशन सेकहीं दूर जाने के लिए निकलते होमैं पत्ते की तरह कांपती हूँतुम्हें शहर के बेरहम...
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