शचीन्द्र आर्य

शचीन्द्र आर्य

    युवा कवि। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कविताएं प्रकाशित। संप्रति अध्यापन। ईर्ष्या का सृजन जब हैसियतसपने देखने की भी नहीं रहीतब ईर्ष्या का सृजन नहीं हुआईर्ष्या का सृजन तब हुआजब हम नहीं जान पाएहमारी सपने देखने वाली रातेंकहाँ और कैसे चोरी हो गईं? पानी और रेत...