संपादकीय मार्च 2026 – ज्ञान से विमुख ज्ञान

संपादकीय मार्च 2026 – ज्ञान से विमुख ज्ञान

शंभुनाथ जर्मन महाकवि गेटे (1749-1832) की प्रसिद्ध कृति है ‘फाउस्ट’। इसका मुख्य चरित्र फाउस्ट ज्ञान से लबालब भरा एक ऐसा व्यक्ति है जो दर्शन, कानून, चिकित्सा, इंजीनियरिंग, धर्मशास्त्र सब पढ़ चुका है और अपने को सर्वज्ञ समझता है। वह अनुभव को भी अपने नियंत्रण में लेना चाहता...
संपादकीय फरवरी 2026 – साहित्य से आत्मध्वंसक दूरी

संपादकीय फरवरी 2026 – साहित्य से आत्मध्वंसक दूरी

शंभुनाथ 21वीं सदी में राजनीतिज्ञों, व्यापारियों, तकनीकविदों आदि की साहित्य से दूरी एक आम दृश्य है। तीनों किस्म के लोग तुरंत लाभ वाले मॉडल पर चलते हैं, जबकि साहित्य सोचने के लिए समय, संवेदनशीलता और दीर्घकालिक दृष्टि की मांग करता है। देखा जा सकता है कि इन दिनों राजनीतिक...
संपादकीय जनवरी 2026 – क्या एआई हमारे बदले हँस सकता है

संपादकीय जनवरी 2026 – क्या एआई हमारे बदले हँस सकता है

शंभुनाथ गांव में एआई आया। किसान ने पूछा- ‘मौसम बता सकते हो?’ एआई ने कहा- ‘हां’। किसान- तो पहले यह बताओ कि मेरा बैल तुम्हें घूर क्यों रहा है?’ एआई चीखा- ‘सिस्टम अलर्ट’… एक्जिट करो!’ विद्यार्थी खुश हैं कि एआई उनका होमवर्क कर देगा, बल्कि वह पीएचडी की थीसिस भी लिख...
संपादकीय दिसंबर 2025 – आधुनिक पुनर्जागरण की प्रस्तावना

संपादकीय दिसंबर 2025 – आधुनिक पुनर्जागरण की प्रस्तावना

शंभुनाथ   आज के उत्तर-आधुनिक परिदृश्य में क्या यह माना जाए कि आधुनिकता एक निष्फल परियोजना थी और आधुनिक मूल्य निरर्थक थे। 20वीं सदी में दुनिया का कोई समाज पूरी तरह आधुनिक नहीं हो पाया। आज भी हमारे देश में नस्ल, प्रांत, धर्म, जेंडर, जाति, पुराजातीयता आदि के आधार पर...
संपादकीय नवंबर 2025 – पत्रकारिता का सूर्यग्रहण

संपादकीय नवंबर 2025 – पत्रकारिता का सूर्यग्रहण

शंभुनाथ   सत्य का मुंह विज्ञापनों से भरा है, फिर भी बंद नहीं किया जा सकता! कोलकाता से 30 मई 1826 को प्रकाशित प्रथम हिंदी समाचार पत्र ‘उदंत मार्त्तण्ड’ का यह द्वि-शताब्दी वर्ष है। निश्चय ही देश की संपूर्ण हिंदी पत्रकारिता के लिए यह एक गौरवमय अवसर है जब हम थोड़ा...