प्रबोध कुमार – जो दूसरों की कथा सुनाते रहे : शर्मिला जालान

प्रबोध कुमार – जो दूसरों की कथा सुनाते रहे : शर्मिला जालान

शर्मिला जालान*ओगो आमार एइ जीवनेर शेष परिपूर्णता,मरण, आमार मरण, तुमि कउ आमारे कथा | अजी, मेरे इस जीवन की शेष परिपूर्णता, मृत्यु, मेरी मृत्यु, तुम कहो मेरी कहानी।प्रकाशित कृतियाँ : शादी से पेशतर( उपन्यास),बूढ़ा चांद (कहानी संग्रह)। स्कूल में अध्यापन। प्रबोध कुमार (8...