शशांक पांडेय

शशांक पांडेय

    युवा कवि। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित। रसोई घर में स्त्री सुबह उठकर आदमी गए टहलनेबच्चे गए मैदान मेंलेकिन एक स्त्री गई रसोई घर में दोपहर मेंआदमी आया दफ्तर से भोजन करनेभोजन किया और चला गयाबच्चे स्कूल से आए और सो गएलेकिन एक स्त्रीबथुआ तोड़ती...
शशांक पांडेय

शशांक पांडेय

    युवा कवि।विभिन्न पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित। हमें ईश्वर नहीं प्रेम चाहिए दो लोग हाथ पकड़े हुए चलते हैंउन्हें ईश्वर नहीं प्रेम चाहिएवे चाहते हैं प्रेम करनाउन्हें ईश्वर की याद दिलाई जाती हैप्रेम में ईश्वर का होनाजरूरी है कि नहींयह हम नहींवे जोड़े तय...