कविता
वरिष्ठ कवि और गीतकार। अद्यतन नवगीत संग्रह ‘एक मुट्ठी भात’। गांव को हम जानते तबसे गांव को हम जानते तबसेजबसे वह पगडंडियों कापेट-पीढ़ा-पैर होता था कुएं का पानी फसल कोजल चढ़ाता थासूर्य भागड़-फ्रेम मेंफोटो मढ़ाता थाबाप बेटी को नहींपहले पढ़ाता थागांव को हम जानते...
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