दान : श्रवण कुमार सेठ

दान : श्रवण कुमार सेठ

‘भैया..! जरा कंबल दिखाइए।’ ‘कैसा कंबल चाहिए भाई साहब…? कितने तक का दिखाऊं, ओढ़ने के लिए या बिछाने के लिए?’ ‘अपने यूज़ के लिए नहीं चाहिए।’ ‘फिर? भिखारियों को दान-वान के लिए तो नहीं चाहिए न…?’ ‘हां… बिल्कुल सही, दान के लिए ही चाहिए था।’ ‘तो ऐसे कहिए ना...