कविताएं  : श्वेतांक कुमार सिंह

कविताएं : श्वेतांक कुमार सिंह

      युवा कवि।संप्रति शिक्षक। मेरे लिए हिंदी मेरे लिए हिंदीमेरा पुश्तैनी घर हैमैं चाहे चला जाऊंसात समुंदर पारपर रहता हूँ हर क्षणउसी घर के आंगन मेंजहां मेरी मांतुलसी के बिरवे के साथ रहती है। हे शिल्पकारो! हे शिल्पकारो!एक देशउन लोगों के लिए भी बनानाजिनके...