कविता
युवा गजलकार। अद्यतन गजल संग्रह ‘चांद बैठा हुआ है पहलू में’। गजल देखकर मंजर जमीं के देवता भी डर गएआदमी तो काम शैतानों से बदतर कर गए कैसे भूलेंगे भला हम जालिमों के ये सितममुल्क भर में किस तरह कुचले हमारे सर गए दफ्न कर दो दरमिया जोधा-ओ-अकबर के हमेंसब गटर तो...
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