श्री लंका की कविताएं 2, अनुवाद : अवधेश प्रसाद सिंह

श्री लंका की कविताएं 2, अनुवाद : अवधेश प्रसाद सिंह

हिंदी अनुवाद- राजेश कुमार झा लेखक, भाषाविद और अनुवादक। सीरी गुणसिंघे (1925-2017) श्री लंका के सुप्रसिद्ध कवि और आलोचक।प्रमुख कविता पुस्तकें :‘अबि निकमाना’, ‘राथु केकुला’ और ‘अलकामंडावा’। भैंसा जल रही थी मेरी दाढ़ीघबराकर मैं भाग रहा थादौड़ता हुआ नीचे की ओरहोने वाला था...