पर्यावरण दिवस पर एक रचना : उपमा ऋचा

पर्यावरण दिवस पर एक रचना : उपमा ऋचा

वैज्ञानिकों और यूएन एजेंसियों ने अनुमान लगाया है कि धरती पर सिर्फ 55 साल के लिए खेती लायक मिट्टी बची है। एक्सपर्ट्स ने विनाशकारी खाद्य संकट की चेतावनी दी है, जिससे दुनिया में भयावह गृहयुद्ध छिड़ सकता है। हमारे पास मिट्टी को बचाने के लिए बहुत कम समय बचा है, अगर हम कल...
बादल को घिरते देखा है (रचना अंश) – नागार्जुन

बादल को घिरते देखा है (रचना अंश) – नागार्जुन

दृश्य संयोजन-संपादन : उपमा ऋचाविशेष आभार : अनवर जमाल, राकेश पंडित, डॉ स्मृति बाघेलाप्रस्तुति : वागर्थ, भारतीय भाषा पारिषद कोलकाता उपमा ऋचा, स्मृति...
जयशंकर प्रसाद की कविताएं : आत्मकथ्य और बीती विभावरी जाग री

जयशंकर प्रसाद की कविताएं : आत्मकथ्य और बीती विभावरी जाग री

हिंदी साहित्य के कालजयी रचनाकार जयशंकर प्रसाद के जन्मदिन के अवसर पर वागर्थ की विशेष प्रस्तुति – आवृत्ति : डॉ. विवेक सिंहध्वनि संयोजन : अनुपमा ऋतु कविता : बीती विभावरी जाग रीगायन : अजय रायनृत्य प्रस्तुति : डॉ स्मृति बाघेला वीडियो संयोजन एवं संपादन : उपमा...