कविता
युवा कवि। विभिन्न पत्रिकाओं में कविताएं प्रकाशित। संप्रति अध्यापक। मां ने बनाया है हृदय मां ने बनाया है हृदयघड़े के समान पकाया है इसे फिर एक दिन उसनेअपने ममत्व के शीतल जल से इसे भर दिया काफी दिनों बाद जब मन हुआ उसकातो जल के स्थान पर उसनेजोड़-तोड़कर...
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