आखिरी पड़ाव के पहले : सुभाष चंद्र कुशवाहा

आखिरी पड़ाव के पहले : सुभाष चंद्र कुशवाहा

सुपरिचित कथाकार, संपादक और लोक-इतिहास के गंभीर अध्येता और लेखक। ‘लोकरंग’ वार्षिकी का १९९८ से निरंतर संपादन।अद्यतन पुस्तक ‘भील विद्रोह’ (संघर्ष के सवा सौ साल), ‘टंट्या भील’ (द ग्रेट इंडियन मून लाइटर)। ‘पिता जी के दिल के दोनों वाल्व खराब हो गए हैं, ठीक से पंप नहीं कर...
1857- घुड़सवार सैनिक, मातादीन और उसके साथियों की बगावत : सुभाष चंद्र कुशवाहा

1857- घुड़सवार सैनिक, मातादीन और उसके साथियों की बगावत : सुभाष चंद्र कुशवाहा

    सुपरिचित कथाकार, संपादक औरलोक-इतिहास के गंभीर अध्येता और लेखक। ‘लोकरंग’ से जुड़े।अद्यतन पुस्तक ‘भील विद्रोह’। अठारह सौ सत्तावन का विद्रोह, कई गुमनाम नायकों को छिपाए अभी भी किंवदंती बना हुआ है।अभी भी बहुत से गुमनाम नायकों के त्याग और बलिदान से हम अनभिज्ञ...
तूफानी के बाद दुनिया : सुभाष चंद्र कुशवाहा

तूफानी के बाद दुनिया : सुभाष चंद्र कुशवाहा

सुपरिचित कहानीकार। किसानों और आदिवासियों पर विशेष शोधपरक कार्य। अद्यतन प्रकाशित कहानी संग्रह, लाला हरपाल और अन्य कहानियां। यह कहानी सुल्तानपुर गांव के तूफानी मास्टर और परमेश्वरपुर के पुराने तालुकेदार, भरत सेठ की अनूठी दोस्ती वृत्तांत से शुरू की जा रही है। तूफानी...