सुजाता कुमारी

सुजाता कुमारी

      कवयित्री और समीक्षक। कविता संग्रह ‘पोखर का पानी’ प्रकाशित। संप्रति स्वतंत्र लेखन। दादी और मैं मेरी दादीजब भी मेरे घर आतीवह जैसे समूची आतीमन-आत्मा सब हमारे लिए लेकर आतीजब हमारे संग होतीतब न दादाजी की चिंता न चाचा और बच्चों कीन उसे अपने घर की वैसी...
सुजाता कुमारी

सुजाता कुमारी

      युवा कवयित्री। कई साझा संकलन। फिलहाल स्वतंत्र लेखन। पोखर और बारिश कई दिनों तक भारी बारिश के बादमेरे गांव-घर के पोखर मेंपानी लबालब भर आया हैजैसे मेरी सफलता परमेरी मां का मन भर आता है पोखर का पानी थिर हैआड़ों में मौजूद वृक्ष पर चढ़ी लताएंपानी को...
कालो : सुजाता कुमारी

कालो : सुजाता कुमारी

एक बार सर्दी के दिनों में मैं ट्रेन से सफर कर रही थी।मेरे सामने वाले बर्थ पर एक बारह साल की बच्ची बैठी हुई थी। वह मुझे भयभीत नजरों से बार-बार निहारे जा रही थी।थोड़ी देर में ही वह नफरत भरे लहजे में कहने लगी- ‘कालो! भागो!’ मैं चकित थी।भला यह बच्ची मुझे देख कर इस तरह...