सुशील स्वतंत्र

सुशील स्वतंत्र

    कवि, लेखक और संपादक। दो उपन्यास, एक कविता संग्रह और आठ संपादित पुस्तकें प्रकाशित।    मुझे डर है मुझे डर हैकि सुकुड़ते आसमान मेंउड़ रही हैं पतंगें मुझे डर हैकि खत्म हो रहे हैंशिशु वार्ड में ऑक्सीजन सिलिंडर मुझे डर हैकि औरतों के लिए हाथरसजिला नहीं पूरा देश...
सुशील स्वतंत्र

सुशील स्वतंत्र

    विभिन्न विधाओं में लेखन। ‘हिंदी साहित्यनामा’ के संपादक। ‘संभावनाओं का शहर’ कविता संग्रह और ‘ये वो संजना तो नहीं’ उपन्यास। अब तानाशाह यातनागृह नहीं बनाता अब तानाशाह यातनागृह नहीं बनातागैस चैंबर भी नहींबस कहता हैबच्चों से बहुत प्यार है मुझेऔर ऑक्सीजन की...