कविता, संस्मरण
अनुवाद :तरसेमकथाकार और अनुवादक। हिंदी और पंजाबी में लेखन। अद्यतन कविता संग्रह ‘हाशिए पर एक कोना’। पंछी तो उड़ गए हैं पंछी तो उड़ गए हैंअब के पेड़ कर रहे हैं मशवरे :चलो चलें यहां से घर घर में पुत्र कहते हैं :छोड़ो बापू अब क्या रखा हैइस जमीन मेंबेच डालो चार पाड़कर के...
कविता
कथाकार और अनुवादक। हिंदी और पंजाबी में लेखन। अद्यतन कविता संग्रह ‘हाशिए पर एक कोना’। लोहा नहीं, यह किसी युद्ध की तैयारी नहींन ही किसी व्यूह की रचनादेश की सीमा हैअपने देश… भारत की अचरज हैजिसकी सड़कों परलोहा छलावे की भांति पड़ा हैकभी यह कंकरीट की दीवार...
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