अखड़ा : पार्वती तिर्की

अखड़ा : पार्वती तिर्की

    युवा लेखिका। रांची विश्वविद्यालय में सहायक प्राध्यापक (हिंदी) के तौर पर कार्यरत। ‘नौर! जल्दी बाहर आओ, चलो नृत्य करने चलें।’ मांझो ने आवाज दी। नौर अपने जूड़े में बगुले का पंख सजा रही थी। घुटने तक अपनी साड़ी कसकर बांधी। हाथ में बांस का पंखा डोलाते हुए बाहर...
मातृत्व (असमिया) : इंदिरा गोस्वामी, अनुवाद : कुल प्रसाद उपाध्याय

मातृत्व (असमिया) : इंदिरा गोस्वामी, अनुवाद : कुल प्रसाद उपाध्याय

बाहर मूसलाधार बारिश हो रही थी। दरवाजे पर खड़े होकर मधु मास्टर ने फिर से एक बार आकाश में उड़ते हुए काले-काले बादलों की ओर देखा। कोने में पड़ी पुरानी छतरी को फिर से एक बार खोलकर देखा –  नहीं, किसी भी हालत में इसे लेकर ऐसे मौसम में बाहर नहीं निकला जा सकता। छतरी के...
सिंगरीली : पार्वती तिर्की

सिंगरीली : पार्वती तिर्की

रांची विश्वविद्यालय में सहायक प्राध्यापक (हिंदी) के तौर पर कार्यरत। आषाढ़ की धनरोपनी का समय आ चुका था।धान के बीज रोपा के लिए निकाले जा रहे थे।लोग अपने बैलों को तैयार कर रहे थे।खेतों में डोभा का काम किया जा रहा था।सोसो गांव में धान की रोपाई लगभग शुरू हो चुकी थी।बिनको...
गिदनी : पार्वती तिर्की

गिदनी : पार्वती तिर्की

काशी हिंदू विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग से ‘कुड़ुख आदिवासी गीत : जीवन राग और जीवन संघर्ष’ विषय पर शोधरत। बिनको!उसके नाना ने उसे पुकारा।जिस रात बिनको का जन्म हुआ था, उस रात आसमान के तारे खूब चमक रहे थे।तारे मानो खुशी से खिलखिला रहे थे।तब नन्ही बच्ची को गोद में लेते हुए,...