सिंगरीली : पार्वती तिर्की

सिंगरीली : पार्वती तिर्की

रांची विश्वविद्यालय में सहायक प्राध्यापक (हिंदी) के तौर पर कार्यरत। आषाढ़ की धनरोपनी का समय आ चुका था।धान के बीज रोपा के लिए निकाले जा रहे थे।लोग अपने बैलों को तैयार कर रहे थे।खेतों में डोभा का काम किया जा रहा था।सोसो गांव में धान की रोपाई लगभग शुरू हो चुकी थी।बिनको...
गिदनी : पार्वती तिर्की

गिदनी : पार्वती तिर्की

काशी हिंदू विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग से ‘कुड़ुख आदिवासी गीत : जीवन राग और जीवन संघर्ष’ विषय पर शोधरत। बिनको!उसके नाना ने उसे पुकारा।जिस रात बिनको का जन्म हुआ था, उस रात आसमान के तारे खूब चमक रहे थे।तारे मानो खुशी से खिलखिला रहे थे।तब नन्ही बच्ची को गोद में लेते हुए,...