कविता
लखनऊ में अध्यापन कार्य। कई साझा कहानी और कविता संकलनों में सहभागिता। श्यामली छाप श्यामली को मैंने देखाबढ़ते हुए दिन के ताप मेंधरती पर नंगे पांव बैठी हुईगोबर में धंसी हुईथाप रही है उपले उसकी थाप पर कहीं कोई संगीत नहीं जागतागोबर में लिपटी हाथ की उंगलियों...
Recent Comments