कितना वसंत है इस पतझर में : उपमा ऋचा

कितना वसंत है इस पतझर में : उपमा ऋचा

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की जयंती पर विशेष मल्टीमीडिया प्रस्तुति ‘वज्रादपि कठोर-मृदुनि कुसुमादपि’ निराला एक विराट समष्टि का नाम है। जीवन को कविता में और कविता को जीवन में उतारकर वंचितों और उपेक्षितों की वेदना, भूख, मान को अपनी आत्मा में महसूस करने वाला...
पतझर, वसंत और प्रेम की तीन कविताएं

पतझर, वसंत और प्रेम की तीन कविताएं

मालवा की गंध में रचे-बसे नरेश मेहता की जन्मशती के अवसर पर वागर्थ की मल्टी-मीडिया प्रस्तुति प्रत्येक नई अभिव्यक्ति को आरंभ में विरोध सहना होता है, लेकिन वर्चस्व वरेण्य बनकर ही रहता है। कल तक, आज की कविता उपेक्षिता थी, लेकिन आज स्वीकृता है। इसका एकमात्र कारण इस काव्य की...
कामायनी स्वप्न सर्ग : एक पाठ, एक दृष्टि

कामायनी स्वप्न सर्ग : एक पाठ, एक दृष्टि

“बुद्धिवाद के विकास में, अधिक सुख की खोज में, दुःख मिलना स्वाभाविक है. यह आख्यान इतना प्राचीन है कि इतिहास में रूपक का भी अद्भुत मिश्रण हो गया है. इसलिए मनु, श्रद्धा और इड़ा इत्यादि अपना ऐतिहासिक महत्व रखते हुए, सांकेतिक अर्थ की अभिव्यक्ति करें, तो मुझे कोई...
गुलाबी चूड़ियां : बाबा नागार्जुन

गुलाबी चूड़ियां : बाबा नागार्जुन

जीवन एक अनंत राग है, यह राग जब किसी साज़ पर जा ठहरता है तो सुर सहेजे जाते हैं और यही राग जब किसी कवि के मन में उतरता है तो लिखी जाती है कविता! आइए वागर्थ की विशेष मल्टीमीडिया प्रस्तुति ‘कविता चित्रपाठ’ के क्रम में इस बार सुनते हैं एक ऐसे ही राग में ढली...
लुईस ग्लूक की 6 कविताएं

लुईस ग्लूक की 6 कविताएं

अजीब बात है कि सच को सच कहने से गुरेज़ करने वाली इस दुनिया ने अगर सबसे ज्यादा सवाल उठाए हैं, तो वह ज़िदगी की तल्ख़ हकीकतों के बीच की ज़िंदगी का रोमन बयान करने वाली कवियों की कौम है। अगर सबसे ज़्यादा दायरे किसी के आसपास खींचे हैं, तो वह ‘कवि’ है और जगह और ज़रूरत...