मल्टीमीडिया
हर कोई जब छाती में बहुत से सपने और माथे में बहुत से ख़याल डाल कर घर से ज़िंदगी ख़रीदने निकलता है, और ज़िंदगी के बाज़ार में ज़िंदगी की क़ीमत सुनता है, तो उसकी छाती में खनकते सब सिक्के बेकार हो जाते हैं। एक ग़ुस्सा था रुके हुए पानी की तरह जिसके निकलने की कोई राह नहीं थी,...
मल्टीमीडिया
वाचन एवं ध्वनि संयोजन : अनुपमा ऋतु (लेखिका एवं अनुवादक)दृश्य संयोजन-सम्पादन : उपमा ऋचा (मल्टीमीडिया एडीटर वागर्थ)प्रस्तुति : वागर्थ, भारतीय भाषा पारिषद कोलकाता अनुपमा ऋतु, उपमा...
मल्टीमीडिया
कविता पाठ :वाचन एवं ध्वनि संयोजन: अनुपमा ऋतु (लेखिका एवं अनुवादक)दृश्य संयोजन-सम्पादन : उपमा ऋचा (मल्टीमीडिया एडीटर वागर्थ)प्रस्तुति : वागर्थ, भारतीय भाषा पारिषद कोलकाता अनुपमा ऋतु, उपमा...
मल्टीमीडिया
कविता पाठ : सूर्यदेव राय (कवि एवं रंगकर्मी)ध्वन्यांकन : अनुपमा ऋतु (लेखिका एवं अनुवादक)दृश्य संयोजन-सम्पादन : उपमा ऋचा (मल्टीमीडिया एडीटर वागर्थ)प्रस्तुति : वागर्थ, भारतीय भाषा पारिषद कोलकाता अनुपमा ऋतु, उपमा ऋचा, सूर्यदेव...
अनुवाद, विश्व दृष्टि
2025 में साहित्य के नोबेल विजेता : लास्लो क्रास्नाहोरकाई इस दौर से गुजरने के लिएहमें पहले से ज्यादा शक्ति की जरूरत है 1954 को ग्यूला (हंगरी) में जन्मे लास्लो क्रास्नाहोरकाई ने अपने पहले ही उपन्यास ‘सेंटेटेगो’ (सातांतगो) से साहित्य के क्षेत्र में एक ख़ास पहचान बना ली...
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