लुईस ग्लूक की 6 कविताएं

लुईस ग्लूक की 6 कविताएं

अजीब बात है कि सच को सच कहने से गुरेज़ करने वाली इस दुनिया ने अगर सबसे ज्यादा सवाल उठाए हैं, तो वह ज़िदगी की तल्ख़ हकीकतों के बीच की ज़िंदगी का रोमन बयान करने वाली कवियों की कौम है। अगर सबसे ज़्यादा दायरे किसी के आसपास खींचे हैं, तो वह ‘कवि’ है और जगह और ज़रूरत...
2020 नोबल विजेता लुईस ग्लूक की कविताएं

2020 नोबल विजेता लुईस ग्लूक की कविताएं

कविता मन से मन का संवाद है। माने एक मन, मुंह बनकर संदेश देता है और एक मन, कान बनकर उसे ग्रहण करता है। बस इतना ही; इससे ज़्यादा कुछ नहीं, लेकिन इससे कम भी कुछ नहीं! क्योंकि मेरे लिए कानों से ग्रहण किया गया, कविता का अनुभव आंखों से प्रेषित होता है। (इसलिए कवि के रूप में)...
लुईस ग्लूक से नोबल मीडिया का साक्षात्कार

लुईस ग्लूक से नोबल मीडिया का साक्षात्कार

ये बहुत नई-नई सी बात हैनोबल साहित्य सम्मान 2020 की घोषणा होने के तुरंत बाद टेलीफोनिक साक्षात्कार के लिए नोबल मीडिया की ओर से लुईस ग्लूक को फोन किया गया। अल्लसुबह एक कप कॉफी की चाहत के साथ, लुईस ने अपने घर से संक्षेप में बात की। साक्षात्कारकर्ता थे, चीफ़ साइंटिफिक...
स्त्री की देह एक क़ब्र है, जो सब कुछ स्वीकार कर लेती है : लुईस ग्लूक/ उपमा ऋचा

स्त्री की देह एक क़ब्र है, जो सब कुछ स्वीकार कर लेती है : लुईस ग्लूक/ उपमा ऋचा

लेखन एवं अनुवाद मौन और मृत्यु का संसार रचने वाली कवयित्री हाल ही में लुईस ग्लूक के नाम वर्ष 2020 के नोबल लिट्रेचर प्राइज़ की घोषणा करते हुए स्वीडिश अकादमी ने उन्हें ‘कविता का अचूक स्वर’ कहा, ‘जो व्यक्तिगत अनुभवों को आडंबरहीन सौंदर्य के साथ प्रस्तुत करके उन्हें...
गा.. नी.. धा.. तीन स्वर और क़िस्सा राग मोहन कौस का/ उपमा ऋचा

गा.. नी.. धा.. तीन स्वर और क़िस्सा राग मोहन कौस का/ उपमा ऋचा

लेखन एवं अनुवाद कार्य लोक, शास्त्रीय, पॉप, जेज़, रॉक…… परिभाषाएं बेशक अलग अलग शब्दों, सीमाओं में बांध दें, लेकिन अंततः यह सभी एक ही कला के भिन्न-भिन्न रूप हैं। जिसे हम संगीत के नाम से जानते हैं। ये एक आवाज है, जो एक आत्मा से निकलती है और सारी सरहदें तोड़कर दूसरी आत्मा...