क्यों ज़रूरी हैं गांधी.

क्यों ज़रूरी हैं गांधी.

यक़ीनन महात्मा गांधी बहुत दोहराया गया विषय है, परंतु चरखा कातने से लेकर लेखन तक और दलित सुधार, गौ रक्षा, ग्राम स्वराज, प्राकृतिक चिकित्सा, अंत्योदय और श्रम की पूंजी के समर्थन से लेकर सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह तक उनके व्यक्तित्व के इतने कोण हैं। इतनी संभावनाएं हैं कि...
अफ़ग़ानिस्तान की बेटियां

अफ़ग़ानिस्तान की बेटियां

आज़ाद हवाओं में सांस लेने वालों के लिए कविता एक शगल हो सकती है, लेकिन बारूदी धुएँ से घुटी फिज़ाओं वाले अफगानिस्तान जैसे देशों में कवि होना, गुमनामियों और मौत को दावत देना है। खासतौर पर तब, जबकि आप एक स्त्री हों। लेकिन मायने तो इसी बात के हैं कि जब मौत सामने खड़ी हो तब आप...
शब्दों की आड़ में अर्थों का दुखांत : उपमा ऋचा

शब्दों की आड़ में अर्थों का दुखांत : उपमा ऋचा

पिछले एक दशक से लेखन में सक्रिय। संप्रति स्वतंत्र पत्रकार और अनुवादक ‘शब्दों पर बात करने के लिए शब्दों का प्रयोग करना ठीक वैसा ही है जैसा कि पेंसिल का चित्र बनाने के लिए पेंसिल का इस्तेमाल करना। एक निहायत ही मुश्किल, पेचीदा और गुमराह करने वाली कवायद!’...
अफ़गानिस्तान की कविताएं

अफ़गानिस्तान की कविताएं

1अफ़गानिस्तान की बेटी : नदिया अंजुमन (1980-2005) मैं नहीं चाहती कि अपनी जुबां खोलूंआख़िर खोल भी लूं, तो बोलूंगी क्या?(क्योंकि) मैं वो हूं, जिससे उसकी उम्र भी नफरत करती रहेगी ताउम्रभले मैं कुछ बोलूँ या नहींमेरी उम्र मुझसे करती रहेगी नफरत ताउम्र मैं कैसे गाऊं गीत शहद...
भारत : एक देश, अनेक दृष्टियां

भारत : एक देश, अनेक दृष्टियां

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर वागर्थ की विशेष मल्टी मीडिया प्रस्तुति फ़िराक़ एवं सुब्रह्मण्यम भारती रचना पाठ : गुरी, चिकित्सक डेन्वर कॉलरॉडो।वाचन स्वर एवं ध्वनि संयोजन : अनुपमा ऋतुदृश्यांकन एवं संयोजन : उपमा ऋचासंगीत : ईशा योग केंद्रप्रस्तुति : वागर्थ भारतीय भाषा परिषद्...