वे आँखें : सुमित्रानंदन पंत

वे आँखें : सुमित्रानंदन पंत

प्रकृति के सुकुमार कवि सुमित्रानंदन पंत की ने महज़ सुकुमार रंगों को ही नहीं सहेजा, उनकी दृष्टि सृष्टि के उस छोर तक गई, जहां जीवन के सबसे दारुण रंग बिखरे थे। यह समय, यह दुख की दारुण बेला जो हमारे सामने है उसमें उनकी यह कविता और प्रासंगिक हो उठी है। दुख की छाया ने सबको...
महामारी के समय में : एन. स्कॉट मोमादे/ अनुवाद : उपमा ॠचा

महामारी के समय में : एन. स्कॉट मोमादे/ अनुवाद : उपमा ॠचा

नेटिव अमरीकन नस्ल ‘किओबा’ मूल के उपन्यासकार, लघुकथा लेखक और कवि। नेटिव अमरीकन रिनेंसा की पहली महत्वपूर्ण कृति ‘हाउस मेड ऑफ डान’ लिखने के लिए 1969 में पुलित्ज़र प्राइज़ से सम्मानित। इन दिनों हम घरों के अंदर रहते हैंजब बाहर निकलने का जोखिम उठाते हैंतो पूरी तरह चौकन्ना...
कोरोना काल की अमरीकी कविताएं, अनुवाद : उपमा ॠचा

कोरोना काल की अमरीकी कविताएं, अनुवाद : उपमा ॠचा

लेखक और अनुवादक। एलिज़ाबेथ बिशप अमरीकन लेखिका एवं कवयित्री। 1956 में पुलित्ज़र प्राइज़, 1970 में नेशनल बुक एवार्ड और 1976 में इंटरनेशनल प्राइज़ फॉर लिटरेचर से सम्मानित। एक कला खोने की कला में सिद्धहस्त होना कोई बहुत बड़ी बात नहीं है कितनी सारी चीजें खो जाने के इरादे से इस...
क़ैदी और कोकिला : माखनलाल चतुर्वेदी

क़ैदी और कोकिला : माखनलाल चतुर्वेदी

रचना : माखनलाल चतुर्वेदीरचना पाठ : अनुपम श्रीवास्तवसंयोजन-संपादन : उपमा ऋचाप्रस्तुति : वागर्थ, भारतीय भाषा परिषद कोलकाता. अनुपम श्रीवास्तव, उपमा ऋचा, माखनलाल...
तुम्हारे बगैर : अवतार सिंह संधू ‘पाश’

तुम्हारे बगैर : अवतार सिंह संधू ‘पाश’

तुम्हारे बगैर… रचना : अवतार सिंह संधू ‘पाश’ आवृत्ति एवं संगीत संयोजन : अनुपमा ऋतुदृश्य संयोजन-संपादन एवं प्रस्तुति : उपमा ऋचा अनुपमा ऋतु, अवतार सिंह संधू ‘पाश’, उपमा...