लिफाफे : उर्मिला शिरीष

लिफाफे : उर्मिला शिरीष

    वरिष्ठ लेखिका। अद्यतन कहानी संग्रह ‘ऐ देश बता तुझे हुआ क्या है’ और अद्यतन उपन्यास ‘खैरियत है हुजूर’। जैसे-जैसे रिटायरमेंट की तारीख निकट आ रही थी वैसे-वैसे पेंशन की चिंता बढ़ती जा रही थी। सुना था, पेंशन बनने और मिलने में महिनों लग जाते हैंं। पेंशन ऑफिस के...
झूठ की चादर : उर्मिला शिरीष

झूठ की चादर : उर्मिला शिरीष

    वरिष्ठ लेखिका। अद्यतन कहानी संग्रह ‘ऐ देश बता तुझे हुआ क्या है’ और अद्यतन उपन्यास ‘खैरियत है हुजूर’। शनिवार का दिन था। दोपहर के दो बजे होंगे। मई की तपती हुई दोपहर। बाजार सूने पड़े थे और लोग लू से बचने के लिए दुकानों में या घरों में बैठे थे। एक वही थी जो...
बहस के बाहर : उर्मिला शिरीष

बहस के बाहर : उर्मिला शिरीष

    वरिष्ठ लेखिका। अद्यतन कहानी संग्रह ‘ऐ देश बता तुझे हुआ क्या है’ और अद्यतन उपन्यास ‘खैरियत है हुजूर’। ‘भाभी जी, मैं दिनेश बोल रहा हूँ। अरुण से बहुत जरूरी बात करनी है। उसका फोन नॉट रिचेबल आ रहा है।’ ‘आप उनके दूसरे नंबर पर लगाकर देखें। लेकिन बात क्या है? आप...
दान-पुण्य : उर्मिला शिरीष

दान-पुण्य : उर्मिला शिरीष

    वरिष्ठ कथाकार।कहानी संग्रहों के अलावा उपन्यास, जीवनी तथा साक्षात्कार भी प्रकाशित।संप्रति स्वतंत्र लेखन।अद्यतन पुस्तक ‘उर्मिला शिरीष की लोकप्रिय कहानियां’। ‘तुम दान-पुण्य करती हो या नहीं?’ ‘करते हैं न।’ ‘कहां? क्या?’ ‘गरीबों और जरूरतमंदों को।’ ‘वह तो...
लालटेन मार्च : उर्मिला शिरीष

लालटेन मार्च : उर्मिला शिरीष

वरिष्ठ कथाकार। कहानी संग्रहों के अलावा जीवनी तथा साक्षात्कार भी प्रकाशित। शासकीय महारानी लक्ष्मीबाई कन्या स्नातकोत्तर (स्वशासी) महाविद्यालय, भोपाल में प्राध्यापक। धूप… गरमी और भीड़। बीमार लोगों की भीड़! भीड़ की चीख-चिल्लाहट। कूलना-कराहना। कितना भी मना करो पर सब एक...