उर्मिला शुक्ल

उर्मिला शुक्ल

    छत्तीसगढ़ी और हिंदी, दोनों भाषाओं में लेखन।  दो कविता संग्रह, तीन यात्रा संस्मरण, एक खंड काव्य और तीन समीक्षा की पुस्तकें। सगोतिया बस्तर की औरतें नहीं जानतींगाजा की बातनहीं मालूम उन्हें कहां है गाजा औरकैसे हैं वहां के लोगफिर भी जब कभी मिलेंगी वेेचीन्ह...
पानी : उर्मिला शुक्ल

पानी : उर्मिला शुक्ल

अद्यतन कहानी संग्रह ‘मैं, फूलमती और हिजड़े’, अद्यतन उपन्यास ‘बिन ड्योढ़ी का घर’। लगातार पानी बहने से लान से होकर सड़क पर पानी रेला सा बह आया था।वे बेचैन हो उठीं।उठकर उनके गेट तक गईं।भीतर झांककर देखा, कोई सुगबुग दिखे तो बता दें कि… मगर भीतर कोई हलचल नहीं।हार कर लौट...
सागोन के दरख्त : उर्मिला शुक्ल

सागोन के दरख्त : उर्मिला शुक्ल

अद्यतन कहानी संग्रह ‘मैं, फूलमती और हिजड़े’, अद्यतन उपन्यास ‘बिन ड्योढ़ी का घर’। गांव में मुर्गा लड़ाई हो रही थी; मगर यहां न तो कोई हाट भरा था और न ही मड़ई।खास बात यह कि लड़ने वाले मुर्गे और इन्हें लड़ाने वाले दोनों एक ही घर से थे, सगे भाई।एक जैसी कदकाठी।फर्क बस आंखों में...